वो इस कदर मेरे ख्वाब मे मिलता है,
जैसे मुरझाया फूल किताब मे मिलता है,
रूबरू होकर उसका पलटकर देखना,
क्या ऐसा नशा भी शराब मे मिलता है...
#100rav
#nidhimishra
किस्सा तब का है जब सारी दुनिया शहर को छोड़ गांव का रुख कर रही थी। पिताजी को घर से काम मिल चुका था और मेरे पढ़ाई की छुट्टी थी तो हमने गोदान की टिकट बुक करा रखी थी, जो की वेटिंग से आरऐसी में आ गई अब हमें कल निकालना था। मां और पापा को एक सीट मिली और मेरा सीट किसी अनजान व्यक्ति के साथ शेयर होने वाला था, मैं बड़ा उत्सुक था की गांव को जाना है हमने कुर्ला टर्मिनस से ट्रेन पकड़ा और आजमगढ़ के लिए रवाना हुए। फिर थाने रेलवे स्टेशन पर पहुंची जहां मेरे साथ जो सीट सांझा करने वाले थे वो चढ़ी एक औरत, जो की पसीने से लतपत और काफी जूना वस्त्र पहने हुए फिर उनके पीछे उसकी बेटी जिसके कपड़े तो मटमैले थे लेकिन वो काफी खूबसूरत थी उसकी आंखे भूंरी थी जो उसे और उम्दा बनाती थी। मेरे पिताजी ने उनके आते ही शोर करना चालू कर दिया आगे जाओ छुट्टा नहीं है ऐसा कहकर फिर वो औरत पास आई और बोली, भाई जी ये हमारा सीट है जो आरएसी में हुआ है मेरे पिताजी ने कहा टिकट दिखाओ उसने टिकट दिखाया लेकिन फिर पिताजी बोले एक सीट है और तुम दो लोग आए हो बिना टिकट सफर करवाना चाहती हो अपनी बेटी को। तो वो औरत बोली साहेब इसका टिकट बनवा लूंगी मैंने ...
मैं कबूतर तो वो खिड़की है मोशमी चाहता हूँ मैं वो लड़की है मोशमी इस ज़माने से क्यों डरती है मोशमी अब ग़लत से निडर लड़ती है मोशमी हीरे जैसी वो अब चमकी है मोशमी ज़ुल्म अब तो नहीं सहती है मोशमी मैं क़दम जैसे तो धरती है मोशमी जैसे बारिश यहाँ पहली है मोशमी नूर तारों में भी भरती है मोशमी देखने में परी दिखती है मोशमी यार क्या अब कहूँ कैसी है मोशमी सोचा था जैसी बस वैसी है मोशमी साथ सौरभ के बस जँचती है मोशमी पर लगन में किसी बहकी है मोशमी इन दिनों जाल में उसकी है मोशमी लौट आ दिल की गर सुनती है मोशमी मत समझ इश्क़ जिस्मानी है मोशमी प्यार से बढ़ के तू पत्नी है मोशमी देर की तू ने अब गर्दी है मोशमी देख आयी मेरी अर्थी है मोशमी
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